21 लाख का बजट डकारने की तैयारी! ठेकेदार की घोर लापरवाही से अंधेरे में रहने को मजबूर आदिवासी
कलेक्टर ने ठोका कारण बताओ नोटिस, 5 अक्टूबर तक बिजली नहीं जली तो रद्द होगा क्रयादेश,
सरकारी धन डकारने वालों पर गिरेगी गाज
उमरिया। जिला खनिज प्रतिष्ठान की लाखों-करोड़ों की विकास निधियों को पलीता लगाने और सरकारी योजनाओं को ठेंगे पर रखने वाले बेपरवाह ठेकेदारों पर अब जिला प्रशासन का चाबुक चलना शुरू हो गया है। ग्राम पंचायत कठई के आदिवासी टोले में विद्युतीकरण (बिजली आपूर्ति) के नाम पर 21 लाख की भारी-भरकम राशि स्वीकृत होने के बावजूद सालों-महीनों से काम लटकाकर आदिवासियों को अंधेरे में धकेलने वाले ठेकेदार संजय कुमार तिवारी को प्रशासन ने आड़े हाथों लिया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं सचिव जिला खनिज प्रतिष्ठान, उमरिया ने ठेकेदार की इस घटिया कार्यशैली और घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त कारण बताओ सूचना पत्र थमा दिया है।
आदिवासी टोला अंधेरे में कैद!
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, डीएमएफ मद से वर्ष 2024-25 में ग्राम पंचायत कठई के अंतर्गत ग्राम सांस में लोक निर्माण विभाग (वि/या) संभाग रीवा के माध्यम से 21.00 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। इस राशि से आदिवासी बस्ती में सुरेश, देवशरण के घर से जगन, मोहन शम्भु के घर तक विद्युतीकरण का कार्य कराया जाना था। प्रशासकीय स्वीकृति जारी होने के बाद कार्य को 6 माह की तय समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरा करना अनिवार्य था। क्रयादेश (29.01.2026) जारी हुए महीनों बीत गए, लेकिन ठेकेदार संजय तिवारी ने मौके पर काम को अधूरा छोड़ रखा है। आलम यह है कि आज भी वहां के गरीब आदिवासी परिवार ढिबरी और मोमबत्ती की रोशनी में रातें काटने को मजबूर हैं।
शासन की छवि धूमिल
ठेकेदार की इस मनमानी और सरकारी पैसे को अटका कर रखने की नियत का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय समाचार पत्रों में इस गंभीर मुद्दे पर लगातार नकारात्मक खबरें प्रकाशित हुईं। अखबारों की खबरों से शासन और जिला प्रशासन की साख पर बट्टा लग रहा था, जिसके बाद आखिरकार जिला खनिज प्रतिष्ठान उमरिया की नींद खुली और जांच बैठा दी गई। प्रशासन ने स्पष्ट माना है कि ठेकेदार की इस बदनीयती और लापरवाही के कारण शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की छवि जनता के बीच खराब हो रही है।
क्रयादेश निरस्त करने और ब्लैकलिस्टिंग की लटकी तलवार
नोटिस में ठेकेदार संजय कुमार तिवारी को दो टूक हिदायत दी गई है कि वे 05 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में उपरोक्त विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कराकर मध्यप्रदेश विद्युत मंडल उमरिया को हस्तांतरित करें और इसका पालन प्रतिवेदन कार्यालय को सौंपें। यदि 5 अक्टूबर तक कार्य पूरा नहीं किया जाता, तो कार्यपालन अभियंता विद्युत मंडल उमरिया द्वारा जारी क्रयादेश को तत्काल निरस्त (रद्द) कर दिया जाएगा और ठेकेदार के खिलाफ विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए ठेकेदार स्वयं जिम्मेदार होंगे।
अधिकारियों की शह पर पनपते हैं ऐसे ठेकेदार
स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि जब 21 लाख का बजट मंजूर था, तो काम में इतनी देरी क्यों की गई? क्या किसी विभागीय साठगांठ के चलते ठेकेदार को ढील दी जा रही थी? अब देखना यह होगा कि 5 अक्टूबर की मियाद पूरी होने के बाद प्रशासन इस ठेकेदार का लाइसेंस निरस्त कर ब्लैकलिस्ट करता है या फिर कागजी चेतावनियों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
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