बजरंग पावर की दादागिरी से दहला समूचा गांव
कोर्ट में मामला पेंडिंग, फिर भी गरीब आदिवासियों की जमीन पर कब्जे की नाकाम कोशिश
थाने पहुंचे आक्रोशित ग्रामीण, गुंडागर्दी, घर में घुसकर गाली-गलौज और धमकी देने के गंभीर आरोप
उमरिया। जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम घुनघुटी में उद्योगपतियों की दबंगई और पैसों की हनक का एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक मामला सामने आया है। बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड से जुड़े लोगों पर आरोप लगे हैं कि वे कानून-कायदों और अदालती प्रक्रिया को धता बताकर गरीब आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे की नीयत से उतर आए हैं। मामला अदालत में विचाराधीन (पेंडिंग) होने के बावजूद कंपनी के नुमाइंदों द्वारा मौके पर जाकर पीड़ित परिवार को प्रताड़ित करने और जमीन खाली कराने के लिए धमकाने की वारदात से पूरे इलाके का माहौल गर्मा गया है।
फिर भी गुंडई पर आमादा कंपनी के नुमाइंदे!
घुनघुटी की जिस विवादित जमीन पर बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की नजर गड़ी हुई है, उसकी कानूनी लड़ाई पहले से ही माननीय न्यायालय के विचाराधीन है। कानून का सीधा नियम है कि जब तक अदालत का अंतिम फैसला न आ जाए, तब तक कोई भी पक्ष यथास्थिति से खिलवाड़ नहीं कर सकता, लेकिन बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के कारिंदों ने कानून को अपनी जेब में समझने की भूल कर डाली। पीड़ित ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि कंपनी के इशारे पर पहुंचे दबंगों ने जबरन जमीन खाली कराने के लिए पूरे परिवार को घेरा और भयानक दबाव बनाया।
जान से मारने की धमकी का आरोप
पाली थाने में ग्रामीणों द्वारा सौंपी गई लिखित शिकायत में बजरंग पावर एंड इस्पात के लोगों पर बेहद संगीन आरोप मढ़े गए हैं। शिकायतकर्ताओं का साफ कहना है कि कंपनी से जुड़े लोग न केवल विवादित जमीन पर जबरन चढ़ आए, बल्कि पीड़ित परिवार के घर में अवैध रूप से घुस गए। घर के भीतर घुसकर महिलाओं और परिजनों के साथ सरेआम गाली-गलौज की गई और जमीन न छोडऩे पर अंजाम भुगतने की सीधी धमकियां दी गईं। कंपनी की इस खुलेआम गुंडागर्दी के बाद पीड़ित परिवार दहशत के साये में जीने को मजबूर है।
उद्योगपति समझें औकात, कानून से बड़ा कोई नहीं
बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड की इस कथित तानाशाही के खिलाफ घुनघुटी और आसपास के पूरे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में भारी आक्रोश की लहर दौड़ गई है। स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों का कहना है कि पूंजीपतियों की शह पर गरीब आदिवासियों की जमीनों को छीनने का यह गंदा खेल अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने दो टूक लहजे में कहा है कि जब मामला अदालत में चल रहा है, तो कंपनी के नुमाइंदों को कानून अपने हाथ में लेने की जुर्रत किसने दी? क्या पैसों के बल पर जिला प्रशासन और पुलिस को लाचार समझ लिया गया है? जब तक नहीं मिलेगी जेल, तब तक जारी रहेगा धरना! बजरंग पावर के खिलाफ फूटे इस जनाक्रोश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने पाली थाने में शिकायत दर्ज कराने के साथ ही आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक भू-माफियाओं और धमकी देने वाले कंपनी के गुंडों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक उनका शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
दांव पर पाली पुलिस की साख
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब गेंद पाली थाना पुलिस के पाले में है। एक तरफ पीड़ित आदिवासी समाज न्याय की आस में थाने के बाहर डटा हुआ है, तो दूसरी तरफ बजरंग पावर जैसी बड़ी कंपनी के रसूखदार नाम सामने हैं। जनता अब पैनी नजरों से देख रही है कि पाली पुलिस पीड़ित गरीबों का साथ देती है या फिर कंपनी के दबाव में आकर मामले को लीपापोती करने की कोशिश करती है। यदि पुलिस ने निष्पक्षता दिखाते हुए घर में घुसकर धमकी देने वालों पर कड़ी आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज नहीं किया, तो यह जन-आक्रोश उग्र रूप धारण कर सकता है!
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