भदार नदी में नियमों को ताक पर रखकर अवैध रेत खनन
जेसीबी व पोकलेन से छलनी हो रही जलधारा, ग्रामीणों ने लगाई शासन प्रशासन से गुहार
उमरिया। जिले के मानपुर तहसील अंतर्गत अमरपुर चौकी क्षेत्र की भदार नदी पर स्थित सलैया रेत घाट पर पर्यावरण कानूनों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल NGT के निर्देशों की धज्जियां उड़ाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पर्यावरणीय प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए बाबा महाकाल मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा नदी के सीने पर भारी मशीनों के जरिए अंधाधुंध खनन का खेल खुलेआम चलाया जा रहा है।
नियमों के विरुद्ध भारी मशीनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और खनन विभाग के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार नदी तल से रेत निकालने के लिए भारी मशीनों जैसे जेसीबी और पोकलेन के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है ताकि नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सके। इसके बावजूद सलैया रेत घाट पर नियमों को ताक पर रखकर पोकलेन और जेसीबी मशीनों से नदी की बहती धारा को काटकर रास्ते बनाए जा रहे हैं।जिसकी शिकायत स्थानीय ग्रामीणों ने लिखित में अमरपुर चौकी को अवगत भी कराया लेकिन स्थिति यह है कि खनन के चलते नदी में 20 से 25 फीट तक गहरे गड्ढे कर दिए गए हैं जिससे जल प्रवाह का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बिगड़ रहा है।
मुरूम की अवैध खुदाई और पर्यावरण को क्षति
स्थानीय ग्रामीणों के लगातार शिकायत के बाद भी परिवहन सुगम करने के लिए कुड़ी गांव के समीप पहाड़ी क्षेत्र से अवैध रूप से मुरूम की खुदाई की क्या खनिज विभाग से अनुज्ञा ली गई और नही ली गई तो मनमानी तरिके से सरकारी राजस्व को नुक़सान तो पहुंचाया ही गया बल्कि बीच नदी में मुरुम का रास्ता बना जिला प्रशासन को चिढ़ाया भी गया? रास्ते का निर्माण किया गया है। इससे न केवल जलीय जीवों और नदी के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है वहीं जल स्तर पर भी बल्कि आसपास के भू-जल स्तर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
नदी में प्रतिबंधित भारी मशीनों के संचालन और पर्यावरण को पहुंचाई जा रही इस क्षति ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि घाट पर न तो सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम हैं और न ही खनन के दौरान मानकों का पालन किया जा रहा है। विरोध करने पर आम जनता की सुनवाई करने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नजर नहीं आता।
एनजीटी के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन
एनजीटी NGT के सख्त निर्देश हैं कि जल स्रोतों के पास किसी भी प्रकार का अवैध उत्खनन या ऐसा कार्य जिससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचे पूरी तरह दंडनीय है। इसके बावजूद खननकर्ताओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे प्रशासनिक और पर्यावरणीय कानूनों को ठेंगा दिखा रहे हैं। क्षेत्र के नागरिकों और पर्यावरणविदों ने शासन प्रशासन से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रभाव से मौके पर भारी मशीनों के संचालन को रोका जाए अवैध खनन में संलिप्त एजेंसी के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए और पर्यावरण को पहुंचे नुकसान का आकलन कर जवाबदेही तय की जाए।
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