आठ करोड़ का धान डकार गए घोटालेबाज

Nov 5, 2026 - 23:09
 0  11
आठ करोड़ का धान डकार गए घोटालेबाज

डीके राइस मिल समेत 8 वेयर हाउस संचालकों का रसूख पुलिस की सुस्त चाल परवान पर या फाइलों पर जम गई है मोटी धूल

कलेक्टर के आदेश और तहसीलदार की पकड़ के बाद भी एफआईआर और वसूली के नाम पर सन्नाटा

उमरिया। सरकारी तिजोरी को दीमक की तरह चाटने वाले भ्रष्टाचारियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसकी बानगी शहडोल जिले में साफ देखी जा सकती है। नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों से सरकारी धान का ऐसा गोलमाल हुआ कि लगभग 8 करोड़ रुपए की संपत्ति हवा हो गई, लेकिन विडंबना यह है कि करोड़ों के इस महाघोटाले को उजागर हुए और वरिष्ठ अधिकारियों के सख्त निर्देश जारी हुए महीनों बीत चुके हैं, फिर भी जिम्मेदारों की कलम सुस्त पड़ी है और पुलिसिया जांच कछुआ चाल से भी धीमी गति से रेंग रही है। हालत यह है कि एक खरीफ सीजन बीत गया और अब दूसरा वर्ष आ गया है, मगर सरकारी खजाने से गायब हुए 8 करोड़ रुपये का आज तक कोई अतापता नहीं है और न ही दोषियों पर कोई ठोस कानूनी डंडा चला है।

तहसीलदार ने पकड़ी थी चोरी 

          यह पूरा मामला तब सामने आया था जब प्रशासनिक चुस्ती दिखाते हुए कलेक्टर के आदेश पर तहसीलदार स्तर के अधिकारी ने गहन छानबीन की और इस सुनियोजित चोरी का पर्दाफाश किया। जांच में यह साफ हो गया था कि नागरिक आपूर्ति निगम का यह शासकीय स्टॉक था, जिसका रिकॉर्ड कागजों से गायब कर दिया गया और लगभग 8 करोड़ रुपये की भारी-भरकम अनियमितता को अंजाम दिया गया। इस खुलासे के बाद हडक़ंप मचा और वरिष्ठ स्तर से यह निर्देश दिए गए कि डीके राइस मिल के संचालक सहित इस खेल में शामिल अन्य 8 वेयर हाउस संचालकों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और एक-एक पाई की वसूली सुनिश्चित की जाए।

          निर्देशों की स्याही सूखी नहीं थी कि फाइलों को ठंडे बस्ते में डालने का पुराना सरकारी खेल शुरू हो गया। कागजी घोड़े दौड़ाने में माहिर विभाग ने पहले तो कागजी लीपापोती में महीनों निकाल दिए और अब बीते तीन माह से अधिक समय से पुलिस इस मामले की जांच करने का राग अलाप रही है। सवाल यह उठता है कि आखिर इतने पुख्ता सबूत मिलने और तहसीलदार की जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में किस बात का डर सता रहा है? क्या पुलिस की सुस्त रफ्तार किसी बड़े राजनीतिक दबाव या रसूखदारों के इशारे पर ब्रेक लगा चुकी है?

घोटालेबाजों के चेहरे पर मुस्कान

          इस मामले में सियासत और रसूख के साये की चर्चाएं भी अब आम हो चुकी हैं। शहर के गलियारों में दबी जुबान से यह कनासुनी तेज है कि हाल ही में जब नागरिक आपूर्ति निगम के एक बड़े पदाधिकारी (उपाध्यक्ष) जिले के दौरे पर आए थे, तो नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वही आरोपी मिलर और संचालक गुलदस्ते लेकर उनके स्वागत में हाजिर हो गए थे। हालांकि इस मुलाकात के राजनीतिक मायने कितने सच हैं और कितने फसाने, यह तो भगवान ही जाने, लेकिन जिस तरह से इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में कार्रवाई लगातार ठंडे बस्ते में जा रही है, उससे जनता का सिस्टम से भरोसा तेजी से उठ रहा है। क्या शहडोल में सरकारी धन पर डाका डालने वाले इतने ताकतवर हो गए हैं कि कानून भी उनके सामने हाथ जोड़े खड़ा नजर आता है?

          सरकारी खजाने पर डाका और मौन साधे बैठे जिम्मेदार जनता के खून-पसीने की कमाई और किसानों के हक का अन्न इस तरह रातों-रात गायब हो जाए और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहे, यह व्यवस्था के माथे पर बड़ा कलंक है। डीके राइस मिल और अन्य संलिप्त वेयर हाउस संचालक बेखौफ घूम रहे हैं, जबकि सरकारी अमला कागजी नोटिसों का खेल खेलने में मस्त है। अब देखना यह है कि क्या शहडोल का यह सिस्टम अपनी गहरी नींद से जागेगा या फिर 8 करोड़ रुपये का यह महाघोटाला भी यूं ही फाइलों के मकडज़ाल में दफन होकर रह जाएगा?

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow