पुलिस के तीसरी आंख ने खोला कूटरचित ई-टीपी का घोटाला!
ब्यौहारी से सरहद पार कर उमरिया पहुंच गए फर्जीवाड़े के पहिए
सोता रहा शहडोल का खनिज विभाग, उपनिरीक्षक की सतर्कता से ताला मोड़ पर पकड़ाया अवैध कोयला
उमरिया। पड़ोसी जिले शहडोल की सीमा से लगे ब्यौहारी और जयसिंहनगर क्षेत्र में खनिज के काले कारोबार का मकडज़ाल किस कदर अपनी जड़ें जमा चुका है, इसका एक और रोंगटे खड़े कर देने वाला प्रत्यक्ष प्रमाण सामने आया है। शहडोल जिला प्रशासन और खनिज विभाग की सरपरस्ती में अपनी आंखें मूंदकर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे से फर्जी ई-टीपी के सहारे लाखों रुपये के राजस्व को चूना लगाकर अवैध कोयले से लदे दो दैत्याकार ट्रक उमरिया जिले की सीमा तक पहुंच गए, लेकिन कहते हैं न कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, जिले के मानपुर थाना अंतर्गत ताला चौकी की सजग पुलिस टीम ने इस अंतरप्रांतीय सिंडिकेट के मंसूबों पर पानी फेरते हुए 68 लाख रुपये से अधिक का मशरूका जप्त कर कागजी जादूगरों की पोल खोलकर रख दी है। *रंगे हाथों धरे गए राजस्थान पासिंग ट्रक *घटनाक्रम के अनुसार 04 अक्टूबर 2026 को मानपुर थाने में पदस्थ उपनिरीक्षक बृजकिशोर गर्ग, सहायक उपनिरीक्षक आनंद केदार एवं शासकीय वाहन चालक रामसेवक पटेल के साथ देहात भ्रमण व जुर्म-जरायम की पतासाजी पर रवाना हुए थे। इसी दौरान ताला मोड़ पर मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम टिहकी जिला शहडोल से दो राजस्थान पासिंग ट्रक कूट रचित दस्तावेजों के सहारे अवैध कोयला लादकर उमरिया की तरफ आ रहे हैं। सूचना मिलते ही उपनिरीक्षक गर्ग ने ताला चौकी के प्रधान आरक्षक विश्वनाथ गुर्जर व आरक्षक अजय रघुवंशी की मदद से मुख्य मार्ग पर कड़ा घेरा डाला। कुछ ही देर में राजस्थान पासिंग ट्रक क्रमांक आरजे 19 जीके 0416 एवं आरजे 19 जीजी 0414 आते दिखे, जिन्हें पुलिस बल द्वारा रोक लिया गया। जब ट्रकों के तिरपाल हटाकर देखा गया, तो दोनों वाहन ऊपर तक काले सोने यानी कोयले से खचाखच भरे हुए थे।
21-21 टन कोयले का मिला घपला
पुलिस टीम द्वारा जब ट्रक चालकों—महेंद्र गोदारा उम्र 31 वर्ष एवं रतनाराम गोदारा उम्र 50 वर्ष निवासी भोपालगढ़ जिला जोधपुर राजस्थान से वाहन व कोयले से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, तो उन्होंने पाण्डेय ब्रदर्स अमलाई-बुढ़ार द्वारा जारी ई-टीपी की कागजी प्रतियाँ प्रस्तुत कीं। प्रस्तुत टीपी में क्रमश: 41.17 टन एवं 41.37 टन कोयला परिवहन किया जाना दर्शया गया था, लेकिन मानपुर पुलिस की पैनी दृष्टि से यह चालाकी छिप न सकी। उपनिरीक्षक बृजकिशोर गर्ग ने अपने मोबाइल से मध्यप्रदेश शासन के खनिज पोर्टल पर जब दोनों ई-टीपी का ऑनलाइन सत्यापन (वेरीफिकेशन) किया, तो चौकन्ना कर देने वाली सच्चाई सामने आई। पोर्टल पर वास्तविक पंजीकृत परिवहन मात्रा मात्र 20.170 टन एवं 20.370 टन दर्ज थी। यानी चालकों और पट्टेदार पाण्डेय ब्रदर्स द्वारा कूटरचित हार्ड कॉपी तैयार कर सीधे-सीधे 21-21 टन अतिरिक्त कोयले का अवैध परिवहन किया जा रहा था, ताकि शासन को लाखों रुपये के राजस्व की चपत लगाई जा सके।
पुलिस की मिसाल
मानपुर पुलिस ने तत्काल तत्परता दिखाते हुए धारा 106 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत दोनों ट्रकों, उसमें लदे अवैध कोयले और कूट रचित दस्तावेजों सहित कुल 68 लाख 38 हजार 414 रूपये की संपत्ति जप्त कर ली। पट्टेदार ऋषभ पाण्डेय पिता बद्रीप्रसाद पाण्डेय, निवासी अमलाई बस्ती, बुढ़ार एवं अन्य के विरुद्ध धारा 318(4), 336(2), 336(3), 338, 340(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध कर गहन विवेचना प्रारंभ कर दी गई है। इस पूरी कार्यवाही ने जहां एक ओर मानपुर पुलिस की मुस्तैदी और कडक़ कार्यशैली का लोहा मनवाया है, वहीं दूसरी ओर शहडोल जिले के खनिज विभाग और स्थानीय पुलिसिंग की गंभीर कार्यप्रणाली पर कटघरे खड़े कर दिए हैं।
सवाल यह उठता है कि ब्यौहारी और जयसिंहनगर से उठकर यह अवैध कोयला दर्जनों किलोमीटर का सफर तय कर शहडोल की सीमा पार कर गया, लेकिन रास्ते में किसी भी खनिज निरीक्षक या जांच दल की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? क्या शहडोल का खनिज अमला महज़ कागजी खानापूर्ति और कुंभकर्णी नींद में मस्त है, या फिर इस कूट रचित खेल की हवा उन्हें जानबूझकर नहीं लगने दी जा रही? यदि मानपुर पुलिस का तीसरा नेत्र ताला मोड़ पर न खुला होता, तो सरकार को लाखों का चूना लगाकर यह कोयला राजस्थान की सीमाओं में दफन हो चुका होता।
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