कागजी पत्राचार में उलझी करोड़ों की हेराफेरी! डीके राइस मिलकांड और एनसीसीएफ फर्जीवाड़े पर मेहरबान प्रशासन

Oct 12, 2026 - 23:35
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कागजी पत्राचार में उलझी करोड़ों की हेराफेरी! डीके राइस मिलकांड और एनसीसीएफ फर्जीवाड़े पर मेहरबान प्रशासन

उमरिया। जिले में अन्नदाता के हक पर डाका डालने वाले रसूखदार राइस मिलरों और भ्रष्ट गठजोड़ के आगे प्रशासनिक कार्रवाई का चाबुक पूरी तरह कुंद साबित हो रहा है। करोड़ों रुपये के सरकारी धान के गबन, आगजनी के ड्रामे और फर्जीवाड़े के संगीन मामलों में महीनों बीत जाने के बाद भी न तो दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसा गया और न ही फूटी कौड़ी की रिकवरी हो सकी। नतीजा यह है कि शासन के खजाने को चूना लगाने वाले माफिया बेखौफ घूम रहे हैं और कार्रवाई फाइलों के जाल में दम तोड़ रही है।

आगजनी की आड़ में बड़ा गबन

          मानपुर तहसील के बसकुटा स्थित डी.के. राइस मिल में गत 9 जुलाई को लगी संदिग्ध आग का सच जांच में बेनकाब हो चुका है। प्रशासनिक जांच टीम की रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यह हादसा नहीं, बल्कि करोड़ों की गड़बड़ी को छिपाने के लिए रचा गया पैंतरा था। मिल संचालक दीपक गुप्ता को 17 रिलीज ऑर्डर के जरिए 7,361 क्विंटल सरकारी धान का उठाव करना था। जिसकी कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये है। हैरान करने वाली बात यह है कि मौके पर न तो सीएमआर चावल मिला और न ही सुरक्षित धान का कोई स्टॉक। कागजी दावों की पोल तब खुली जब मौके पर केवल 807 बोरी जली हुई पाई गईं, जबकि 7 हजार क्विंटल से ज्यादा धान जलने का झूठा ताना-बाना बुना गया था। जांच में 1,107 बोरी घटिया, कच्ची और खंडा मिश्रित धान पाई गई। साफ है कि असली सरकारी धान को खुले बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमाया गया और मिल में कचरा भर दिया गया।

एफआईआर पर लगा ब्रेक 

          3 करोड़ के इस घोटाले में नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के दावे तो किए गए, लेकिन दो महीने बाद भी नतीजा सिफर है। अब पूरा मामला कोतवाली पुलिस और नागरिक आपूर्ति निगम के बीच पत्राचार की फुटबॉल बनकर रह गया है। पुलिस का कहना है कि विभाग ने जो दस्तावेज दिए हैं, वे अधूरे हैं। वित्तीय अनियमितता और घटना के ठोस साक्ष्यों को लेकर दो बार पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन जवाब नदारद है। सवाल उठना लाजिमी है कि क्या जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है ताकि आरोपियों को बचने का पूरा मौका मिल सके? 3 महीने बाद भी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते अफसर धान उपार्जन वर्ष 2024-25 के दौरान एनसीसीएफ की खरीदी में हुआ घपला भी अब ठंडे बस्ते में धकेल दिया गया है। एमपी सिविल सप्लाई और एनसीसीएफ के सिंडिकेट ने एक ही रिलीज ऑर्डर में हेराफेरी कर अवैध रूप से धान का उठाव किया। मामला उजागर होने पर 22 जून 2026 को मानपुर के राइस मिलरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। तीन महीने बीत जाने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर केवल गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकने का खेल जारी है। खाद्य विभाग का दावा है कि कार्रवाई एनसीसीएफ को करनी है, जबकि एनसीसीएफ का कहना है कि अब वसूली नागरिक आपूर्ति निगम करेगा। इस प्रशासनिक ढुलमुल रवैये से साफ जाहिर है कि रसूखदारों को बचाने का ताना-बाना बुना जा चुका है।

बुलंद हौसले, ठगा जा रहा किसान

          सरकारी अनाज को डकारने वाले इस संगठित गिरोह पर शिकंजा न कसने से जिले भर के किसानों में भारी आक्रोश है। एक तरफ गरीब किसान दाने-दाने को मोहताज है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खजाने की डकैती करने वाले मिल संचालक खुलेआम घूम रहे हैं।

इनका कहना है...

          हमने मिलर्स वाले प्रकरण में जांच प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई के लिए पत्र पुलिस को सौंप दिया है। उनकी तरफ से जांच पड़ताल किया जा रहा है।    -रोहित सिंह प्रभारी नागरिक आपूर्ति निगम, उमरिया।

          नागरिक आपूर्ति निगम की तरफ से हमें एक पत्र बसकुटा राइस मिल के खिलाफ मिला है। पत्र के अनुसार विभाग से और जानकारी मांगी गई है।   -मदन मरावी टीआई कोतवाली।

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