एनएच-43 या यमराज का रास्ता? भ्रष्टाचार चरम पर, जगह जगह पड़ी दरारें, निर्माण पूर्ण नहीं

Apr 26, 2026 - 22:42
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एनएच-43 या यमराज का रास्ता? भ्रष्टाचार चरम पर, जगह जगह पड़ी दरारें, निर्माण पूर्ण नहीं

उमरिया।  अगर आप एनएच-43 से शहडोल की ओर जा रहे हैं, तो सावधान! यह सडक़ नहीं, बल्कि मौत का वह दलदल है जहां कदम-कदम पर यमराज आपका स्वागत करने के लिए दरारें फाड़े बैठे हैं। 15 साल का लंबा वनवास काट चुकी यह सडक़ आज भी अधूरी है और जितनी बनी है, वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। जिला प्रशासन के खोखले निर्देश और एमपीआरडीसी की बेशर्मी के बीच ठेका कंपनी टीव्हीसीएल जनता के खून-पसीने की कमाई (अरबों रुपए) से अपनी तिजोरियां भर रही है।

एक तरफ निर्माण, दूसरी तरफ विनाश

          कहावत है कि रोम एक दिन में नहीं बना था, लेकिन उमरिया-शहडोल मार्ग को देखकर लगता है कि इसे बनाने में सदियां बीत जाएंगी। 15 साल से कछुआ गति से चल रहा निर्माण कार्य अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रहा है। मजे की बात तो देखिए कि एक तरफ टीवीसीएल कंपनी डामर बिछाने का ढोंग कर रही है, तो दूसरी तरफ पुरानी बिछी हुई परतें दरक कर चौड़ी खाइयां बन चुकी हैं। यह सडक़ निर्माण है या सरकारी खजाने की खुली लूट है।

करकेली-अमहा के बीच फिर बहा खून

          बीती 23 अप्रैल को इस कातिल सडक़ ने एक और बलि लेने की कोशिश की। ग्राम धनवाही निवासी एक महिला जब अपने रिश्तेदार के घर से लौट रही थी, तब दोपहर 2 बजे के करीब करकेली और अमहा के बीच सडक़ की एक गहरी दरार ने मोटरसाइकिल के अगले पहिए को जकड़ लिया। मोटरसाइकिल अनियंत्रित हुई और पीछे बैठी महिला सडक़ पर जा गिरी। सिर में आई गंभीर चोटें चीख-चीख कर सिस्टम से पूछ रही हैं कि आखिर इस खून का जिम्मेदार कौन है? क्या टीवीसीएल कंपनी के रसूखदार ठेकेदार इन घायलों का दर्द समझेंगे?

दरारें इतनी कि समा जाए पहिया

          एनएच-43 पर भ्रष्टाचार की परतें इतनी मोटी हैं कि सडक़ बनते ही टूटने लगी है। राहगीरों का कहना है कि सडक़ के बीचों-बीच ऐसी दरारें आ गई हैं जो दूर से दिखाई नहीं देतीं। जैसे ही कोई दोपहिया वाहन चालक वहां पहुंचता है, पहिया उन दरारों में फंसकर लॉक हो जाता है। अरबों रुपए खर्च करने के बाद ऐसी सडक़ बनाई गई है जो हल्की धूप और ट्रैफिक का दबाव भी नहीं झेल पा रही। पूर्व कलेक्टरों से लेकर वर्तमान अधिकारियों तक ने कड़े निर्देश के कई कागजी तीर छोड़े, लेकिन एमपीआरडीसी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग और ठेका कंपनी के बीच जुगलबंदी इतनी गहरी है कि जनता की जान की कोई कीमत ही नहीं बची। *किसकी जेब में जा रहे हैं अरबों रुपए यह सडक़ निर्माण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का एक अंतहीन सर्कस बन चुका है। जनता का सवाल सीधा है कि जब सडक़ पूरी बनकर तैयार ही नहीं हुई, तो वह उखडऩे क्यों लगी? घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग और तकनीकी मापदंडों की अनदेखी करके टीवीसीएल कंपनी ने इस मार्ग को डेथ ट्रैप में तब्दील कर दिया है। लगता है विभाग चाहता है कि लोग सडक़ पर चलने के बजाय घर पर ही रहें, क्योंकि सडक़ पर निकलना मतलब अस्पताल या श्मशान की गारंटी लेना है।

मौन प्रशासन और बेबस राहगीर

          सडक़ पर आए दिन हो रही दुर्घटनाओं ने कई घरों के चिराग बुझा दिए, कईयों को उम्र भर के लिए अपाहिज बना दिया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठकर फाइलों पर शीघ्र पूर्ण करें की टीप लिखकर अपना कर्तव्य इतिश्री मान लेते हैं। उमरिया से शहडोल के बीच का सफर अब सफर नहीं, बल्कि एक खतरनाक स्टंट बन गया है। क्या प्रशासन किसी बड़े नरसंहार का इंतजार कर रहा है? क्या टीवीसीएल कंपनी पर ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई करने के बजाय उसे और समय दिया जाएगा ताकि वह भ्रष्टाचार की कुछ और दरारें पैदा कर सके, जिले की जनता अब सडक़ों पर उतरने को मजबूर है। यदि समय रहते इस खूनी सडक़ की मरम्मत और निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले समय में आक्रोश का लावा फूटना तय है।

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