खण्डन वायरल करके गलती पर पर्दा डाल रहें डीपीसी, खण्डन में भी अज्ञानता

खण्डन वायरल करके गलती पर पर्दा डाल रहें डीपीसी,  खण्डन में भी अज्ञानता

मामला:- BRC-APC की नियुक्ति का

उमरिया।   जिले में बीते दिनों हुई सर्व शिक्षा अभियान में बीआरसी और एपीसी की नियुक्ति लगातार सवालों के घेरे में बनी हुई है, दोनों इन महत्वपूर्ण पदों पर सरकारी नियमों को ताक में रखते हुए अपने चहेते को डीपीसी ने नियुक्ति दे दी, जबकि मैडम किसी भी भष्ट्राचार और जांच को नही मानती है, इसके अलावा उन्होंने यह स्वयं ही कबूल कर लिया कि किसी के आरोप लगाने से संबंधित व्यक्ति आरोपी नही हो जाता है, जबकि उन्हीं के विभाग ने संबंधित एपीसी पर भष्ट्राचार का आरोप साबित किया, जिसका पत्र भी सोसल मीडिया में छाया हुआ है॥ भष्ट्राचार को हजम न कर पाने के कारण डीपीसी ने सोसल मीडिया में अपनी करतूतों को खण्डन के रूप में दर्शा दिया है, *उन्होंने खंडन में लिखा है कि पूर्व के एपीसी व बीआरसी लगातार 10 वर्षो से कार्यरत थे, इन्हें 4 वर्ष से अधिक हो चुका था और नियमानुसार नये भी इसी नियम पर कार्य कर रहे हैं* खण्डन में अप्रत्यक्ष रुप से यह भी कह दिया गया है कि पूर्व के बीआरसी व एपीसी के द्वारा ही ऐसे कार्य मीडिया को बताये जाते हैं, वह नही चाहते थे कि वह अपने पद से हटें, जबकि नियम के अनुसार लगातार 10 वर्ष की सेवा करने के बाद वह संबंधित परीक्षा के भी पात्र नही रहते है॥

विवेक मिश्रा पर मारपीट का आरोप
          नवीन पदस्थापना पर पाली में बतौर बीआरसी के रुप में पदस्थ विवेक मिश्रा का नाता विवादों से पुराना रहा है, कहीं अपने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा सुनी तो कहीं गोलमाल, यहां तक कि इनसे महिला भी नही बच सकी है॥ जानकारी है कि शा. उत्कृष्ट विद्यालय में विवेक मिश्रा NCC के मास्टर थे, जिन्हें इन्हीं सब लापरवाही के कारण निलंबित कर दिया गया था, आरोप था कि इन्होंने महिला शिक्षक के साथ मारपीट की थी, जिस पर पीड़ित महिला ने शिकायत भी दर्ज कराई थी, इसके बाद लालपुर शा. स्कूल में भी लापरवाही सामने आई और फिर इन्हें कालरी स्कूल अटैच कर दिया गया॥ बाद में राज्य शिक्षा केन्द्र के बीआरसी के विज्ञापन के बाद इन्होंने अभ्यार्थी के रुप में आवेदन किया और चयन समिति ने इनकी समस्त कारगुजारियों को दरकिनार करते हुए बीआरसी का पद दे दिया॥ इन सब के बाद भी डीपीसी का अहम रोल अदा करने वाले जिम्मेदार ने बिना विभाग या स्कूल से सहमति या यूं कह दें कि बिना जांच पड़ताल के ही विवेक मिश्रा को पात्र कर दिया॥ इन सब के बाद भी डीपीसी का आरोपों से किनारा करना समझ के परे है॥