बांधवगढ़ में आधे दर्जन जंगली हाथियों को पहनाए जाएंगे रेडियो कॉलर, मानव-हाथी संघर्ष रोकने की बड़ी पहल
उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष पर लगाम लगाने के लिए वन विभाग ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है।वर्ष 2017 में छत्तीसगढ़ से आए महज सात जंगली हाथियों का कुनबा अब बढ़कर करीब 97 तक पहुंच गया है। लगातार बढ़ती संख्या और गांवों की ओर हाथियों की आवाजाही को देखते हुए वन प्रबंधन ने छह जंगली हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाने का निर्णय लिया है। कॉलर लगने के बाद वन विभाग को उनकी रियल टाइम लोकेशन मिलती रहेगी,जिससे गांवों में समय रहते अलर्ट जारी कर संभावित हादसों को टाला जा सकेगा।
हालांकि, इस योजना के अमल में अभी कुछ समय लग सकता है, बताया जाता है कि जिन आधा दर्जन जंगली हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाया जाना है,उनके लिए विशेष कॉलर दक्षिण अफ्रीका से मंगाए जाने की संभावना है, ऐसे में फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि कॉलरिंग की प्रक्रिया कब तक शुरू हो पाएगी।हाल ही में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आयोजित कार्यशाला में इस महत्वाकांक्षी योजना पर सहमति बनी। वर्तमान में हाथियों के कई झुंड बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं। कई बार ये खेतों और गांवों तक पहुंच जाते हैं, जिससे फसलों को नुकसान और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। रेडियो कॉलर के माध्यम से वन अमला हाथियों की हर गतिविधि पर लगातार नजर रख सकेगा।जैसे ही कोई झुंड आबादी की ओर बढ़ेगा, संबंधित गांवों को पहले ही सतर्क कर दिया जाएगा। इससे ग्रामीणों की सुरक्षा बढ़ेगी और वन विभाग भी समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर सकेगा।
दो दिवसीय प्रवास पर बांधवगढ़ पहुंचीं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, मध्यप्रदेश शमिता राजौरा ने कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व हमारी प्राथमिकता है। रेडियो कॉलरिंग से हाथियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी, जिससे संघर्ष की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही उनके आवागमन, व्यवहार और प्राकृतिक गलियारों का वैज्ञानिक अध्ययन भी किया जा सकेगा। यह तकनीक वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों की सुरक्षा, दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
वन अधिकारियों का मानना है कि यह पहल केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष के स्थायी समाधान की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है। यदि यह योजना सफल रही, तो बांधवगढ़ देश के उन प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल होगा,जहां आधुनिक तकनीक के जरिए हाथियों और इंसानों के बीच टकराव कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
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