खनिज विभाग की कार्रवाई बेअसर, एनएच-43 पर नहीं थम रहा अवैध कोयले का खेल, सवालों के घेरे में पुलिस और यातायात व्यवस्था

Jun 27, 2026 - 14:57
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खनिज विभाग की कार्रवाई बेअसर, एनएच-43 पर नहीं थम रहा अवैध कोयले का खेल, सवालों के घेरे में पुलिस और यातायात व्यवस्था

उमरिया। जिले में अवैध खनिज परिवहन पर अंकुश लगाने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बीते दिनों खनिज विभाग द्वारा अवैध कोयला परिवहन करते एक वाहन पर कार्रवाई कर उसे जब्त किया गया था। उस समय माना जा रहा था कि इस कार्रवाई के बाद अवैध कारोबारियों में खौफ पैदा होगा और कोयले के अवैध परिवहन पर लगाम लगेगी, लेकिन हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं।

          सूत्रों के अनुसार जिले से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर आज भी अवैध कोयले से लदे वाहनों की आवाजाही जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय ही नहीं, बल्कि दिन के उजाले में भी कई वाहन संदिग्ध परिस्थितियों में कोयला लेकर गुजरते देखे जा सकते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।

          जानकार बताते हैं कि शहडोल क्षेत्र से निकला कोयला विभिन्न रास्तों से होते हुए कटनी की ओर पहुंचाया जा रहा है। इस पूरे नेटवर्क में कई छोटे-बड़े वाहन शामिल बताए जाते हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब मुख्य मार्ग पर लगातार वाहन गुजर रहे हैं तो आखिर उनकी जांच क्यों नहीं हो रही है।

          सबसे बड़ा प्रश्न यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। एनएच-43 जिले का प्रमुख मार्ग है, जहां चौबीसों घंटे पुलिस और यातायात अमले की निगरानी रहने का दावा किया जाता है। ऐसे में यदि अवैध कोयले से भरे वाहन लगातार गुजर रहे हैं तो या तो निगरानी व्यवस्था कमजोर है या फिर कहीं न कहीं जिम्मेदार विभागों की उदासीनता सामने आ रही है।

          क्षेत्र के लोगों का कहना है कि खनिज विभाग की एक-दो कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। यदि वास्तव में अवैध परिवहन रोकना है तो संयुक्त अभियान चलाकर परिवहन मार्गों पर सघन जांच की आवश्यकता है। केवल एक वाहन जब्त कर देने से पूरे नेटवर्क पर प्रभाव पड़ना मुश्किल दिखाई देता है।

          चर्चा यह भी है कि अवैध कोयला परिवहन करने वाले लोगों को मार्ग और निगरानी व्यवस्था की पूरी जानकारी रहती है, जिसके चलते वे आसानी से अपने वाहनों को गंतव्य तक पहुंचाने में सफल हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर सूचना तंत्र और जांच व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

          फिलहाल जिले में अवैध कोयला परिवहन को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। अब देखना होगा कि खनिज विभाग की पिछली कार्रवाई के बाद पुलिस, यातायात विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती हैं और एनएच-43 पर चल रहे कथित अवैध कोयले के कारोबार पर कब तक प्रभावी रोक लग पाती है।

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