छब्बीस लाख का राशन डकार गया प्रबंधक, सरकारी दुकान बना लूट का अड्डा

Mar 26, 2026 - 02:58
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छब्बीस लाख का राशन डकार गया प्रबंधक,  सरकारी दुकान बना लूट का अड्डा

उमरिया। कहते हैं रक्षक ही भक्षक बन जाए तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?  जिले के पाली जनपद अंतर्गत ग्राम कुशमहा खुर्द से भ्रष्टाचार की एक ऐसी घिनौनी तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है, बल्कि यह भी बता दिया है कि चंद रुपयों की खातिर गरीबों के चूल्हे बुझाने में भी रसूखदारों को शर्म नहीं आती। शासकीय उचित मूल्य की दुकान के प्रबंधक गुलाब चंद नापित ने गरीबों के हक पर ऐसा डाका डाला कि सुनने वालों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

मशीन पर अंगूठा, थाली रही खाली

          घोटाले का तरीका इतना शातिर था कि आम आदमी समझ ही नहीं पाया। आरोपी प्रबंधक गुलाब चंद ग्रामीणों को राशन देने के नाम पर बुलाता, उनसे ई-पॉश मशीन पर अंगूठा लगवाता और रिकॉर्ड में अनाज का 'वितरण' दिखा देता। लेकिन जब बात अनाज देने की आती, तो ग्रामीण खाली हाथ घर लौटते। यह खेल एक-दो दिन नहीं, बल्कि कई महीनों तक चलता रहा। करीब 26 लाख रुपये की कीमत का सरकारी अनाज गरीबों के पेट में जाने के बजाय सीधे काले बाजार की भेंट चढ़ गया।

प्रशासन में हडक़ंप, आरोपी सलाखों के पीछे

          जब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटा और भूख की चीखें सडक़ों पर आईं, तब जाकर प्रशासन की कुंभकर्णी नींद खुली। खाद्य विभाग ने जब शुरुआती जांच की, तो दस्तावेजों और धरातल की हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर मिला। मामला उजागर होते ही विभाग ने आनन-फानन में पाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी गुलाब चंद नापित के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इतना बड़ा घोटाला अकेले एक प्रबंधक के बल बूते संभव था?

साहब, हम भूखे सोए और वो तिजोरियां भरता रहा

          कुशमहा खुर्द के पीडि़त परिवारों का कहना है कि वे पूरी तरह सरकारी राशन पर निर्भर हैं। कई महीनों से उन्हें अनाज नहीं मिला, जिससे उनके सामने दाने-दाने का संकट खड़ा हो गया। एक ओर सरकार अंत्योदय के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे भ्रष्ट नुमाइंदे उन दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि उनके हक का अनाज उन्हें वापस मिलना चाहिए और दोषियों की संपत्ति कुर्क होनी चाहिए।

जांच की आंच में झुलसेंगे और भी सफेदपोश

          पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस 26 लाख के महाघोटाले के तार और कहां-कहां जुड़े हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना ऊपरी संरक्षण के इतना बड़ा गबन संभव नहीं है। क्या विभाग के अन्य छोटे-बड़े कर्मचारी भी इस मलाई में हिस्सेदार थे? पुलिस की डायरी में अब उन चेहरों की तलाश है जो पर्दे के पीछे रहकर इस लूट को खाद-पानी दे रहे थे।

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