कोयले की भूख में नौनिहालों का भविष्य दांव पर!

Jul 7, 2026 - 21:04
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कोयले की भूख में नौनिहालों का भविष्य दांव पर!

कंचन खदान के साए में घुलघुली स्कूल विधायक की मौजूदगी में कलेक्टर को अल्टीमेटम

उमरिया। कहते हैं विकास की कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन जब यह कीमत मासूम बच्चों के भविष्य और उनकी जान को दांव पर लगाकर वसूली जाए, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। जिले के घुलघुली में कुछ ऐसा ही नजारा है, जहां कंचन खुली खदान के भारी-भरकम दैत्यों (अधिग्रहण और विस्थापन) की नजर अब शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पर टिकी है। धरती का सीना चीरकर कोयला निकालने को बेताब प्रबंधन को शायद यह नहीं दिख रहा कि इस बारूद के ढेर के ठीक बगल में सैकड़ों बच्चों का भविष्य आकार ले रहा है। इसी गंभीर संवेदनशील मुद्दे पर बीते सोमवार 6 जुलाई 2026 को घुलघुली में महापंचायत बैठी। बांधवगढ़ के विधायक शिवनारायण सिंह (लल्लू भैया) और सरपंच वीरेंद्र प्रताप सिंह की अगुवाई में क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों ने हुंकार भरी और नवगत कलेक्टर महोदया के नाम एक ऐसा सख्त और कडक़ ज्ञापन तैयार किया, जिसने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

साहब! पहले धमाका थामिए, बच्चे पढ़ रहे हैं!

          खदान में होने वाली हैवी ब्लास्टिंग (भारी विस्फोट) से कब किस बच्चे के सिर पर छत गिर जाए, इसकी गारंटी न तो एसईसीएल प्रबंधन के पास है और ना ही जिला प्रशासन के पास। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि जब तक विस्थापन नहीं होता, स्कूल यहीं लगेगा। लेकिन कोल माइंस के ब्लास्टिंग मास्टर अपनी मर्जी से बारूद नहीं फोड़ेंगे। महापंचायत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ है कि स्कूल का समय सुबह 09 से दोपहर 03 बजे तक तय किया जाए। कंचन खदान प्रबंधन को सख्त हिदायत दी जाए कि दोपहर 03 बजे से पहले खदान में एक भी पटाखा नहीं फूटना चाहिए। साथ ही, ब्लास्टिंग की तीव्रता इतनी कम हो कि आसपास के मकानों और स्कूल की दीवारों को अटैक न आए।

25 गांवों के बच्चे और 10 किलोमीटर का सफर

          यह कोई शहर का नामी-गिरामी कान्वेंट स्कूल नहीं है जहां बच्चे आलीशान बसों से आते हैं। इस हायर सेकेंडरी स्कूल में घुलघुली समेत आसपास के करीब 20 से 25 गांवों के गरीब-किसान वर्ग के बच्चे 8 से 10 किलोमीटर का सफर पैदल या साइकिल से तय करके आते हैं। खदान के भारी वाहनों की आवाजाही और धूल के गुबार के बीच इन बच्चों का सफर वैसे ही मौत के कुएं से गुजरने जैसा है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुचारू आवागमन की जिम्मेदारी किसकी है? ज्ञापन में इस बात पर तीखे सवाल दागे गए हैं।

नया सर्वसुविधायुक्त भवन कब बनेगा?

          प्रबंधन ने स्कूल अधिग्रहित तो कर लिया, लेकिन नए भवन के नाम पर अब तक केवल कागजी कसरत ही दिखाई दे रही है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, जिनमें जिला पंचायत सदस्य श्रीमती मीना कैलाश सिंह, मंडल अध्यक्ष शिवकुमार साहू (मैक्स), रामबली सिंह, रामनरेश गुप्ता और शिवकुमार शुक्ला शामिल हैं, ने पुरजोर मांग की है कि नए सर्वसुविधायुक्त स्कूल भवन का निर्माण तत्काल, बिना किसी कछुआ चाल के शुरू किया जाए।

मुख्यमंत्री से लेकर महाप्रबंधक तक पहुंची गूंज

          बैठक के अंत में ग्रामीणों और प्राचार्य राजकुमार महोबिया सहित पूरे स्टाफ के हस्ताक्षर युक्त एक तीखा शिकायती पत्र नवगत कलेक्टर को भेजा गया। इसकी एक-एक प्रतिलिपि भोपाल में बैठे मुख्यमंत्री महोदय, जिला शिक्षा अधिकारी (ष्ठश्वह्र) उमरिया और जोहिला क्षेत्र नौरोजाबाद के महाप्रबंधक (त्ररू) को भी भेजी गई है, ताकि ऊपर वालों को भी पता चले कि नीचे बारूद के ढेर पर बैठकर बच्चे ककहरा सीख रहे हैं।

          अब गेंद प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के पाले में है। देखना यह है कि कोयले के काले मुनाफे के आगे साहबों को बच्चों का उजला भविष्य दिखाई देता है या फिर हमेशा की तरह वादों की लीपापोती कर दी जाएगी। जनता की नजरें टिकी हुई हैं, और गुस्सा सातवें आसमान पर है!

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