एक ही आसन पर अमर हुए साहब बिरसिंहपुर पावर हाउस में दशकीय साम्राज्य पर उठे सवाल!

Jul 7, 2026 - 20:56
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एक ही आसन पर अमर हुए साहब बिरसिंहपुर पावर हाउस में दशकीय साम्राज्य पर उठे सवाल!

उमरिया। कहते हैं कि सरकारी नौकरी में तबादला एक ऐसी संजीवनी है जो व्यवस्था को सडऩे से बचाती है। लेकिन मध्यप्रदेश के सबसे बड़े बिजली घरों में से एक, संजय गांधी ताप विद्युत गृह (बिरसिंहपुर) की यूनिट क्रमांक 3 और 4 में नियम-कायदों का पावर कट हो चुका है। यहां एक ही परम प्रतापी साहब पिछले एक दशक (10 साल) से अपनी कुर्सी पर फेविकोल का ऐसा मजबूत जोड़ लगाकर बैठे हैं कि बड़े-बड़े प्रशासनिक आदेश भी उन्हें डिगा नहीं पाए। परियोजना के गलियारों से लेकर उमरिया के पान के ठेलों तक, अब यह कौतूहल का विषय बन चुका है कि आखिर साहब की इस अटूट कुर्सी भक्ति का राज क्या है?

प्रमोशन पाया, पर मोहल्ला नहीं बदला!

          प्रशासनिक नियमावली चिल्ला-चिल्ला कर कहती है कि संवेदनशील पदों पर बैठे अधिकारियों का समय-समय पर ट्रांसफर होना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बची रहे। लेकिन यहाँ तो सुशासन की धज्जियां उड़ रही हैं। सूत्रों की मानें तो इन महाशय ने इसी यूनिट की छांव में रहते हुए पदोन्नति (प्रमोशन) के मीठे फल भी चख लिए, लेकिन मजाल है कि उनका कार्यक्षेत्र बदला हो! पद बदल गया, रुतबा बढ़ गया, लेकिन यूनिट नंबर 3 और 4 से उनका जनम-जनम का नाता अटूट रहा। बिजली घर के कर्मचारियों के बीच अब यह आम धारणा बन चुकी है कि जब एक ही संवेदनशील पद पर कोई लंबे समय तक अंगद की तरह पैर जमा लेता है, तो वहाँ उसका अपना एक समानांतर साम्राज्य खड़ा हो जाता है।

ठेका, मेंटेनेंस और आर्थिक चमत्कार की चर्चाएं

          जब बिजली के तारों से ज्यादा साहब के रसूख में करंट आ जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि पिछले कुछ वर्षों में यूनिट के भीतर जितने भी तकनीकी और मेंटेनेंस के काम हुए, उनकी गुणवत्ता भगवान भरोसे थी। ठेका आवंटन की प्रक्रियाओं में ऐसी जादूगरी दिखाई गई कि जानकार भी उंगलियां दबा लें, हालांकि, समाचार पत्र स्वतंत्र रूप से इन आरोपों पर मुहर नहीं लगाता, लेकिन जनता की जुबान पर लगे तालों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब तो क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने सीधे-सीधे साहब के आर्थिक चमत्कार पर उंगली उठा दी है। मांग तेज हो रही है कि पिछले 5 वर्षों में साहब की संपत्ति में जो रोशनदान खुला है और जितनी तेजी से लक्ष्मी जी ने उनके घर पर अपनी कृपा बरसाई है, उसके स्रोतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

सुशासन का फ्यूज उड़ा, अब प्रबंधन पर टिकीं निगाहें

          क्या संजय गांधी ताप विद्युत गृह का प्रबंधन इस दशकीय साम्राज्य से अनजान है या फिर ऊपर से नीचे तक सब ऑल इज वेल के सुर में सुर मिला रहे हैं? सुशासन का तकाजा तो यही कहता है कि हर संवेदनशील पद की समीक्षा हो। अगर साहब पूरी तरह पाक-साफ हैं, तो वे जांच से क्यों कतराएंगे? एक निष्पक्ष जांच ही उनकी ईमानदारी का सर्टिफिकेट दे सकती है।

          अब देखना यह है कि बिरसिंहपुर का यह शीर्ष प्रबंधन इस गंभीर मामले पर अपनी आंखें खोलता है या फिर धृतराष्ट्र बनकर कुर्सी के इस तमाशे को देखता रहता है। क्षेत्र की जनता की निगाहें अब प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह संस्थान की साख बचाता है या फिर इस दशकीय मोह को और पल्लवित होने देता है।

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