सौंदर्यीकरण के नाम पर कमीशनखोरी का आरोप, सगरा तालाब बना कमाई का जरिया 

Apr 29, 2026 - 23:56
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सौंदर्यीकरण के नाम पर कमीशनखोरी का आरोप, सगरा तालाब बना कमाई का जरिया 

उमरिया।  जिले के बिरसिंहपुर पाली नगर पालिका क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक सगरा तालाब का सौंदर्यीकरण अब सवालों के घेरे में है। करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से हो रहे फ्लाई ऐश पिचिंग कार्य में गुणवत्ता से ज्यादा कमीशन की गूंज सुनाई दे रही है। स्थिति यह है कि काम ठीक से शुरू भी नहीं हुआ और इस्तेमाल हो रही सामग्री में दरारें नजर आने लगी हैं।

          स्थानीय लोगों के मुताबिक, तालाब किनारे रखे गए फ्लाई ऐश के पत्थरों में पहले ही क्रैक दिखने लगे हैं। यह संकेत साफ है कि निर्माण की नींव ही कमजोर रखी जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी क्या यह संरचना टिक पाएगी?

          इस पूरे मामले में ठेकेदार पंडित जी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि वे नियमों को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से काम करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि तालाब के भीतर से ही मिट्टी निकालकर उसी का उपयोग पिचिंग में किया जा रहा है, जबकि बाहर से मिट्टी लाने के लिए अलग से लाखों रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह सीधे-सीधे आर्थिक अनियमितता की ओर इशारा करता है।

          तकनीकी मानकों की भी खुलकर अनदेखी हो रही है। नियमों के तहत पिचिंग से पहले डस्ट डालकर रोलर चलाना जरूरी होता है, लेकिन यहां बिना बेस मजबूत किए ही फ्लाई ऐश के पत्थर लगाए जा रहे हैं। इससे यह साफ है कि काम की गुणवत्ता से ज्यादा फोकस लागत बचाने और काम जल्द निपटाने पर है।

          कांग्रेस नेत्री और वार्ड क्रमांक 5 की पार्षद ऊषा कॉल ने इस मामले को लेकर खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सगरा तालाब का सौंदर्यीकरण अब कमीशनखोरी का अड्डा बन चुका है। उन्होंने कलेक्टर उमरिया से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग करने की बात कही है और चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी।

          इंजीनियर संतोष पांडे के स्थानांतरण के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब निर्माण कार्यों में सुधार आएगा, लेकिन ठेकेदार पंडित जी की मनमानी के चलते हालात जस के तस बने हुए हैं। इससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

          स्थानीय नागरिकों के मन में एक और आशंका गहराने लगी है। लोग कह रहे हैं कि कहीं सगरा तालाब का हाल भी नवनिर्मित बस स्टैंड की दुकानों जैसा न हो जाए, जहां निर्माण पूरा होने से पहले ही दरारें सामने आ गई थीं। अगर अभी से ऐसी स्थिति है, तो भविष्य को लेकर चिंता स्वाभाविक है।

          इतिहास में सगरा तालाब का विशेष महत्व रहा है। करीब 45 एकड़ में फैला यह तालाब कभी शहर की जीवनरेखा था। बुजुर्ग बताते हैं कि इसका पानी इतना स्वच्छ था कि लोग इसे पीने तक के लिए इस्तेमाल करते थे। लेकिन आज यह तालाब अनदेखी और कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।

          नगर पालिका उपाध्यक्ष राजेश पटेल का कहना है कि निर्माण कार्य का निरीक्षण कराया जाएगा और गुणवत्ता की जांच होगी। हालांकि लोगों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह जांच वास्तविक होगी या सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रह जाएगी।

          सगरा तालाब का सौंदर्यीकरण शहर के विकास की पहचान बन सकता था लेकिन मौजूदा हालात इसे दूध देती गाय में बदलते दिख रहे हैं, जहां ठेकेदार पंडित जी की मनमानी और कमीशनखोरी की चर्चाएं आम हो गई हैं।

          अब निगाहें कलेक्टर मैडम पर टिकी हैं। जरूरत है कि वे इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करें और निष्पक्ष, उच्चस्तरीय जांच कराएं, ताकि सच सामने आए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सके। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक तालाब का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और करोड़ों रुपये के सही इस्तेमाल का है।

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