दस साल का अनुभवी शिकारी हुआ बेबस,बांधवगढ़ में कमजोर तेंदुए का सफल रेस्क्यू
उमरिया। जंगल का फुर्तीला और बेहद चतुर शिकारी माना जाने वाला तेंदुआ जब उम्र और कमजोरी के आगे बेबस नजर आया,तो बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का वन अमला उसकी मदद के लिए तुरंत सक्रिय हो गया। मगधी रेंज की रोहनिया बीट में वन गश्ती के दौरान करीब 10 वर्षीय नर तेंदुआ अत्यधिक कमजोर अवस्था में दिखाई दिया। वन कर्मियों ने उसे एक दिन पहले देखा था, जिसके बाद उसकी लगातार निगरानी की जाती रही। हालत में सुधार नहीं होने पर रविवार को प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम ने पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में सफलतापूर्वक उसका रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के बाद वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.राजेश तोमर ने प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में तेंदुए का निचला दाहिना कैनाइन दांत पूरी तरह घिसा हुआ मिला, जबकि अन्य कैनाइन दांत भी काफी घिस चुके थे। माना जा रहा है कि दांत घिस जाने के कारण वह प्रभावी ढंग से शिकार नहीं कर पा रहा था, जिससे लंबे समय से पर्याप्त भोजन नहीं मिलने के कारण उसकी शारीरिक स्थिति बेहद दुर्बल हो गई। विशेषज्ञों के अनुसार,10 वर्ष का तेंदुआ अपने जीवन के अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा होता है।
सामान्यतः जंगल में तेंदुए 12 से 15 वर्ष तक जीवित रहते हैं।इस उम्र में उनकी फुर्ती, ताकत और शिकार करने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। कैनाइन दांत घिस जाने से बड़े शिकार को पकड़ना और उसका मांस फाड़ना भी मुश्किल हो जाता है,जिससे कुपोषण और कमजोरी की स्थिति पैदा हो सकती है।
रेस्क्यू के दौरान तेंदुए के सभी आवश्यक चिकित्सकीय नमूने लिए गए। फिलहाल उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सुरक्षित रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार दिया जा रहा है। पूरे अभियान के दौरान क्षेत्र संचालक डॉ अनुपम सहाय सहित वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। वन परिक्षेत्र अधिकारी सचिन सिंह ने रेस्क्यू अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा घायल, बीमार या कमजोर वन्यजीवों के लिए भविष्य में भी ऐसे त्वरित रेस्क्यू अभियान जारी रहेंगे।_
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