डॉक्टरी की पढ़ाई मातृभाषा से कराने एमपीे देश का पहला राज्य, एक्सपर्टो ने तैयार की फर्स्ट ईयर की किताबें,गृहमंत्री अमित शाह 16 को करेंगे विमोचन

डॉक्टरी की पढ़ाई मातृभाषा से कराने एमपीे देश का पहला राज्य, एक्सपर्टो ने तैयार की फर्स्ट ईयर की किताबें,गृहमंत्री अमित शाह 16 को करेंगे विमोचन

भोपाल।  एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने वाले छात्रों को अब तक अंग्रेजी में पढ़ाई करनी पड़ती थी। लेकिन अब मध्यप्रदेश में छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई अपनी मातृभाषा हिंदी में भी कर सकेंगे। मध्य प्रदेश सरकार का यह निर्णय छात्र हित में एक महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला है। इसी के साथ भारत देश में मातृभाषा हिंदी से एमबीबीएस की पढ़ाई कराने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य बन गया है। जिसकी तैयारियां भी पूर्ण कर ली गई है। बीते कुछ महीने से प्रमुख एक्सपर्ट डॉक्टर एमबीबीएस की अंग्रेजी किताबों को हिंदी में कन्वर्ट कर प्रथम ईयर की किताबे तैयार कर ली है। कल 16 अक्टूबर को देश के गृहमंत्री अमित शाह भोपाल की राजधानी पहुंच रहे हैं और फर्स्ट ईयर की हिंदी वर्जन किताबों का विमोचन करेंगे।

           गौरतलब है कि विदेशों में जैसे रूस, जापान, यूक्रेन, फिलीपींस, किर्गिस्तान और चीन जैसे देशों में मातृभाषा में एमबीबीएस कराने वाले देश जाने जाते रहे है। लेकिन भारत मे सिर्फ अंग्रेजी भाषा मे एमबीबीएस की पढ़ाई की जाती रही है। लेकिन अब अन्य देशों  की तर्ज पर अब भारत देश के मध्य प्रदेश में इसकी शुरुआत हो रही है। मध्यप्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद बहुत से प्रमुख और एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम बीते कुछ महीनों से इसमें काम कर रहे हैं। एक्सपर्टो के द्वारा अंग्रेजी वर्जन की एमबीबीएस  किताबों को ट्रांसलेट कर हिंदी वर्जन किया जा रहा है । एक्सपर्टो के द्वारा एमबीबीएस के फर्स्ट ईयर की किताबें हिंदी में तैयार भी कर ली गई है। जिसके बाद कल 16 अक्टूबर को एमपी आ रहे देश के गृहमंत्री अमित शाह भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में एमबीबीएस की हिंदी वर्जन किताबों का विमोचन करेंगे।

          इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार बताया गया कि इस पूरे प्रोजेक्ट का नाम मंदार रखा गया है। मंदार रखने के पीछे एक प्रमुख वजह भी है वह यह कि समुद्र मंथन में मंदार पर्वत के सहारे अमृत निकला था। ठीक उसी प्रकार अंग्रेजी की एमबीबीएस किताबों का हिंदी में अनुवाद किया गया है। मंदार नामक प्रोजेक्ट में शामिल एक्सपर्टो और प्रमुख डॉक्टरों ने विचार मंथन करके हिंदी वर्जन की किताबें तैयार किए हैं, जो इस देश और प्रदेश के छात्रों के लिए बड़े ही गर्व का विषय है, जो अपनी मातृभाषा में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू कर सकेंगे और यह शुरुआत देश के मध्य प्रदेश राज्य से हो रही है।

          बताया गया कि प्रदेश के क्षेत्रीय अंचलों में हिंदी में पढ़ाई कर रहे छात्र जिन्हें एमबीबीएस की पढ़ाई करने में उत्सुकता है वह अपनी मातृभाषा हिंदी में भी एमबीबीएस की पढ़ाई कर सकेंगे। एक्सपर्टो ने एमबीबीएस की फर्स्ट ईयर की तीन किताबें तैयार किया है। जिनके शब्द हिंदी में उपलब्ध नहीं है उन्हें देवनागरी में लिखा है। बताया गया कि सरकार ने सबसे पहले इसे प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में शुरू करने जा रही हैं। जिससे प्रदेश के छात्र हिंदी भाषा में एमबीबीएस की पढ़ाई कर सकेंगे।

 Source: online.