एस ई सी एल में खुलेआम भ्रष्टाचार, प्रशासन मौन
उमरिया। जहां एक तरफ केन्द्र और राज्य सरकार भ्रष्टाचार को समाप्त करने की कोशिश में लगी हुई है, लेकिन जिले में भ्रष्टाचार समाप्त होंने का नाम ही नहीं ले रहा है।
एक ऐसा ही मामला घुलघुली कोयला खदान से आया है।कि वहां की जमीनें कब से अधिग्रहण कर ली गई थी और वर्षों पूर्व सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया गया था जिसमें ड्रोन कैमरा के माध्यम से सर्वे भी कराया गया था। साथ ही वहां कितनी भूमि पर और कहां कहां घर बने हुए है एवं कितनी भूमि खाली पड़ी है, उसका भी डाटा तैयार किया जा चुका था। किंतु इस समय सफेद पोष दलालों के माध्यम से आज घुलघुली में व्यापक पैमाने पर भवन निर्माण का कार्य निर्वाध रूप से जारी है, यहां तक कालरी प्रबंधन को सूचना होने पर भी धृतराष्ट्र बनकर बैठे हुए है, आदिवासियों और उनकी भूमि का भी खेला देखने को मिल रहा है जिसमें भूमि मालिक बैगा जनजाति का गरीब व्यक्ति है उस पर धनकुबेरों की नजर पड़ी और पैसे का लालच देकर पूरा पैसा धन कुबेर लगाकर विशाल भवन बनाकर मुआवजा के लिए तैयार करने में जुट गये है, वहां पर ऐसे अनेक गिरोह काम कर रहे हैं जिससे आम जनमानस पर असन्तोष व्याप्त है और उनमे भय का वातावरण भी है । साथ ही कच्चा निर्माण सामाग्री का भी उपयोग हो रहा जिससे कभी भी निर्मित घर गिर सकता है और किसी प्रकार की अप्रिय घटना हो सकती है! वहां के स्थानीय पुस्तैनी निवासियों का मानना है कि हम कई वर्षो से यहां के निवासी हैं और प्रबंधन द्वारा जैसा निर्देशित किया गया हमने उसका पालन भी किया। किंतु क्या ये नियम कानून सिर्फ हमारे लिए ही है इन बेईमान, रिश्वत खोर लोग ऐसे ही गरीबों का शोषण करते रहेंगे, और जनजाति समाज के लोगों का खून चूसते रहेंगे।
इस सम्बन्ध में जवाबदार अधिकारियो का ध्यान आकर्षण होना चाहिए और न्याय और विधि संगत कार्यवाही की जानी चाहिए जिससे जनता में शासन के प्रति विश्वास बना रहे।
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