गणेश चतुर्थी के अवसर पर बीटीआर में हाथियों की पूजा अर्चना कर कराया गया कई फलों का भोग

उमरिया। बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा आज गणेश चतुर्थी के अवसर पर एक विशेष पहल करते हुए रिजर्व के सभी 15 कैंपों में हाथियों की पूजा अर्चना की गई तथा सभी हाथियों को फल एवं पौष्टिक आहार प्रदान किया गया। इस अवसर पर हाथियों के लिए केले, गन्ना, नारियल, मौसमी फल एवं गुड़ आदि की व्यवस्था की गई। इसका उद्देश्य हाथियों के पोषण और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए आज गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर इन हाथियों से आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
ये हाथी कैंप बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के विभिन्न परिक्षेत्रों में तैनात हैं और वन प्रबंधन, गश्ती एवं संरक्षण गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जंगल की निगरानी, आगजनी नियंत्रण, रेस्क्यू कार्य तथा मानवीय दबाव वाले क्षेत्रों में सक्रिय प्रबंधन कार्यों में इनकी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। ये मानव वन्य प्राणी द्वंद को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
हाथियों की पारिस्थितिकी भूमिका
हाथी केवल रिजर्व प्रबंधन के ही नहीं, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
बीज फैलाव और वन पुनर्जनन
हाथी बड़ी मात्रा में बीजों को अपनी आंतों के माध्यम से दूर-दूर तक ले जाकर जमा करते हैं, जिससे पौधों की विविधता बढ़ती है।
प्राकृतिक उर्वरक
हाथियों का गोबर बीज और पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो मिट्टी की उर्वरता और पौधों की वृद्धि में सहायक है।
छत्र और अंतराल निर्माण
हाथी झाड़ियों और पेड़ों को हटाकर खुले मैदान और अंतराल तैयार करते हैं, जिससे विभिन्न प्रजातियों को पनपने का अवसर मिलता है।
पर्यावास और जैव विविधता का निर्माण
हाथियों द्वारा बनाए गए रास्ते अन्य वन्यजीवों की आवाजाही और फैलाव को आसान बनाते हैं।
जैव विविधता में वृद्धि
एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने में हाथियों की भूमिका अत्यंत आवश्यक है। इनके द्वारा बनाए गए वातावरण में अनेक अन्य प्रजातियाँ पनपती हैं।
कैंप हाथियों के नाम
गौतम (Male), सुंदरगज (Male), राम (Male), लक्ष्मण (Male), सूर्य (Male), गणेश (Male), श्याम (Male), अष्टम (Male), अनारकली (Female), पूनम (Female), बांधवी (Female), गायत्री (Female), मुरली (Male), बरखा (Female), गंगा (Female)।
इन हाथियों की दैनिक देखभाल के लिए प्रशिक्षित महावत तैनात रहते हैं, जो उन्हें आहार, स्नान और स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करते हैं। समय-समय पर इनके स्वास्थ्य की नियमित जाँच और पौष्टिक आहार की व्यवस्था की जाती है।
इस अवसर के माध्यम से बांधवगढ़ प्रबंधन ने संदेश दिया कि हाथी केवल संरक्षण कार्यों के सहभागी ही नहीं, बल्कि वन्यजीव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षक भी हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि आज बांधवगढ़ तथा आस पास के वनों में जंगली हाथी भी निवास कर रहे है। धीरे धीरे यह क्षेत्र हाथियों के रहवास के रूप में विकसित हो रहा है।
गजो वनस्य शोभायै, गजो वनस्य रक्षिताः। गजो हि वनजीवस्य, प्राणदातास्तु नः सदा॥
अर्थ : हाथी वन की शोभा है, वन का रक्षक है। वह वन से सम्बन्धित समस्त जीवों के लिए जीवनदाता है—और सदा बना रहे।
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