इज्जत और एहतराम के साथ हज़ारों नमाज़ियों ने अदा की ईद की नमाज़

कलेक्टर, एसपी ने जिले वासियों को दी बधाई
उमरिया। इज्जत और एहतराम के साथ मुख्यालय स्थित ईदगाह में सोमवार की सुबह करीब 9.30 बजे ईदुल-फितर की नमाज़ अदा की गई।इस मौके पर मुख्यालय से सटे दर्जनों गांव के मुस्लिम भाई भी शरीक हुए और हजारों की तादात में मौलाना साकिर हलीमी साहब की इमामत में ईद की नमाज़ पढ़ी।नमाज़ के बाद अमन और शांति के साथ मुल्क की बेहतरी की दुवाए की गई। इस मौके पर हाजी उस्मान मंसूरी, डॉ मंसूर अली, जामा मस्जिद सदर शेख आज़ाद, गौसिया मस्ज़िद सदर हाजी इदरीस खान, कब्रिस्तान कमेटी सदर हाजी शाहिद अली ने इस मुबारक मौके पर जिले वासियों को बधाई दी और ईद के त्यौहार पर बेहतर व्यवस्था के लिए प्रशासन का आभार व्यक्त किया। ईद की नमाज़ मुख्यालय के अलावा जिले के बिरसिंहपुर, नोरोजाबाद, चंदिया, मानपुर, अमरपुर, मेढकी सहित कई जगहों पर अदा गई। इस मौके पर ईदगाह में कलेक्टर धरणेन्द्र जैन, पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू ने सभी मुस्लिम भाइयों, जिले वासियों को ईद की बधाई प्रेषित की। इनके अलावा ऐड. एसपी प्रतिपाल सिंह महोबिया, एसडीएम, एसडीओपी नागेंद्र प्रताप सिंह, थाना प्रभारी बालेन्द्र शर्मा, यातायात प्रभारी सीके तिवारी, तहसीलदार, सीएमओ किशन सिंह ठाकुर सहित कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे, इन्होंने भी सभी मुस्लिम भाइयों के गले लगकर बधाई दी है। इनके अलावा नपा उपाध्यक्ष अमृत लाल यादव, पार्षद अशोक गौंटिया, राजेन्द्र कोल, सतवंत सिंह, सोमचन्द वर्मा सहित गणमान्य नागरिक भी ईदगाह पहुंचकर मुस्लिम भाइयों को ईद की शुभकामनाएं दी है।
आपसी सद्भाव के प्रतीक ईदुल -फितर इबादत के महीने रमज़ान के बाद चांद दिखने पर अदा की जाती है, मुस्लिम मान्यता है कि रमज़ान के 30 दिन इबादत में मशरूफ रहते हुए रोज़े रखने के बाद ईद की नमाज़ तोहफा स्वरूप है,इस वजह से ईदुल-फितर का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है,इस दिन मुस्लिम भाई नए कपड़े पहनते है,और एक दूसरे के गले लगकर खुशी का इज़हार करते है।इस दिन बच्चों में खासा उत्साह दिखता है।इबादत के महीने रमज़ान के बाद मनाए जाने वाले ईद के इस त्यौहार में गरीबों का भी विशेष ख्याल रखा जाता है।खास तौर से अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ज़कात फितरा के नाम से गरीबो को दिया जाता है,जिससे गरीब भी नए कपड़े पहने और ईद की खुशी में बराबरी से शामिल हो।
ईद की नमाज़ से पहले जकात अदा करना इस्लाम में बुनियादी इबादतों में से एक माना गया है।मुस्लिम भाइयों के लिए ईद का त्यौहार इस वजह से भी खास है कि इस्लामिक मान्यता के मुताबिक पवित्र माह रमजान में ही पहली बार पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब को पवित्र कुरान का ज्ञान प्राप्त हुआ था।
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