खाद्य पदार्थाे से संबंधित संचालित प्रतिष्ठानों की नियमित जांच के कलेक्टर ने दिए निर्देश

खाद्य सुरक्षा प्रशासन की जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक संपन्न
उमरिया । खाद्य सुरक्षा प्रशासन की जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन की अध्यक्षता में संपन्नु हुई । कलेक्टर ने खाद्य पदार्थाे से संबंधित संचालित प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करने, अमानक या एक्स्पायरी खाद्य पदार्थाे का विक्रय करने वाले प्रतिष्ठानों के विरूध्द न्यायालयीन कार्यवाही करने, बिना पंजीयन अथवा अनुज्ञप्ति प्राप्त किए प्रतिष्ठान संचालित करने वाले लोगों पर कार्यवाही करनें के निर्देश जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी को दिए। उन्होने कहा कि अमानक खाद्य पदार्थ मिथ्याछाप खाद्य तथा असुरक्षित खाद्य पदार्थ का विक्रय करने वाले लोगों पर शासन व्दारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्यवाही की जानी चाहिये। आपनें खाद्य सुरक्षा से संबंधित जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करनें तथा समस्त स्व सहायता समूहों , आंगनबाडी एवं सेंटलाइज किचन का खाद्य विभाग से पंजीयन अनिवार्य रूप से प्राप्त करनें के निर्देश दिए । विभिन्न शासकीय योजनाओं में फोर्टीफाईड भोज्य पदार्थ का उपयोग करनें की सलाह दी। बैठक में अपर कलेक्टर शिवगोविंद सिंह मरकाम, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिपाल सिंह महोबिया, सीएमएचओ डा एस बी चौधरी, उद्योग विभाग से अमन व्दिवेदी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग मनमोहन सिंह कुशराम, जिला आपूर्ति अधिकारी बी एस परिहार, उप संचालक कृषि संग्राम सिंह मरावी, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से विनोद मिश्रा , अशासकीय सदस्यं अभिषेक अग्रवाल एवं श्याकम गुप्ता , बुध्दराम रहंगडाले, राघवेन्द्र तिवारी उपस्थित रहे ।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी मंजू वर्मा ने बताया कि 1 जनवरी 2024 से मार्च 2025 तक जिले में नमूना संग्रहण के 70 के लक्ष्य के विरूध्द 121, सर्विलांस नमूना के 280 के विरूध्द 289 , निरीक्षण 120 के विरूध्द 181 तथा चलित खाद्य प्रयोगशाला व्दारा 89 नमूने संग्रहित किए गए । जिनमें से 86 मानक पाए गए तथा 3 नमूने अमानक पाए गए । 35 नमूने जांच हेतु लंबित है । अपर कलेक्टर न्यायालय में दर्ज किए गए प्रकरणों में से 3 का निराकरण कर 12 हजार रूपये की अर्थदंड वसूली की गई है तथा 3 प्रकरण अनिर्णयित है । जिले में 265 अनुज्ञप्तियां तथा 664 पंजीयन जारी किए गए है जिनसे 13 लाख 90 हजार 600 रूपये की राजस्व प्राप्त हुई है । उन्होने बताया कि असुरक्षित खाद्य एवं बिना लाइसेंस के व्यापपार संबंधी प्रकरणों को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है जिनमे आजीवन कारावास का प्रावधान है ।
अशासकीय सदस्यों अभिषेक अग्रवाल तथा श्याम गुप्ता ने नियमित रूप से खाद्य सामग्री का विक्रय करने वाले संस्थानों की नियमित जांच करनें , अपमिश्रित दूध , सेंथेटिक दूध एवं मावा की जांच करनें का सुझाव दिया । उन्होने कहा कि निरंतर कार्यवाही से जनता में विश्वास बढेगा तथा लोगों को शुध्द खाद्य सामग्री प्राप्त हो सकेगी ।
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